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अमदाबाद के सरकारी विद्यालय ने पेश की मिसाल: कॉन्वेंट स्कूलों की तर्ज पर हुआ PTM और रिपोर्ट कार्ड वितरण*

KATIHAR/Bihar

अहमदाबाद, कटिहार: शिक्षा के क्षेत्र में सरकारी विद्यालयों की छवि को बदलते हुए उत्क्रमित मध्य विद्यालय (UMS) पहाड़पुर ने एक बार फिर अपनी उत्कृष्टता साबित की है। सोमवार को विद्यालय परिसर में ‘प्रगति पत्रक वितरण एवं अभिभावक-शिक्षक संगोष्ठी (PTM)’ का आयोजन किया गया, जिसकी भव्यता और व्यवस्था किसी बड़े निजी कॉन्वेंट स्कूल से कम नहीं थी।

प्रधानाध्यापक की पहल और जन-भागीदारी

प्रधानाध्यापक मो० वसीम रज़ा के कुशल नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों और उनके अभिभावकों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के प्रति जागरूक करना था। कार्यक्रम में कुल 1081 छात्र-छात्राओं के बीच प्रगति पत्रक (Progress Report) का वितरण किया गया। इस दौरान बच्चों के माता-पिता का उत्साह देखते ही बनता था; कुल 523 अभिभावकों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराकर विद्यालय की इस पहल का समर्थन किया।

शिक्षक टीम का सराहनीय योगदान

इस आयोजन को सफल बनाने में विद्यालय के समर्पित शिक्षकों की टीम ने दिन-रात मेहनत की। वहीद नवाज, शिवानी धिमान, शिवानी गुप्ता, ममता गुप्ता, पंकज यादव, ब्रजेश कुमार, महेश रविदास, जीनत प्रवीण, मोहिब्बुल इस्लाम, सहाबुल इस्लाम और सीनू कुमार सिंह सहित सभी वर्ग शिक्षकों की निष्ठा और कर्मठता की अभिभावकों ने खुले दिल से प्रशंसा की।

संवाद से निकले समाधान: अभिभावकों के सुझाव

बैठक के दौरान अभिभावकों और शिक्षकों के बीच सीधा संवाद हुआ। ग्रामीण क्षेत्र के माता-पिता ने विद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था पर संतोष व्यक्त किया, साथ ही कुछ महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए। अभिभावकों ने मांग की कि:

* गणित और अंग्रेजी जैसे कठिन विषयों के लिए विशेष कक्षाएं आयोजित की जाएं।

* बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए स्पोकन इंग्लिश क्लास की शुरुआत की जाए।

सरकारी विद्यालय बना ‘बेहतर शिक्षण संस्थान’

प्रधानाध्यापक मो० वसीम रज़ा ने इस मौके पर कहा, “हमारा लक्ष्य सरकारी विद्यालय को केवल एक स्कूल नहीं, बल्कि एक आधुनिक और बेहतर शिक्षण संस्थान के रूप में स्थापित करना है, जहां देहात के बच्चों को भी शहर की तर्ज पर सुविधाएं और शिक्षा मिल सके।”

नीले और सफेद गुब्बारों से सजे प्रवेश द्वार, सेल्फी पॉइंट और व्यवस्थित बैठने की व्यवस्था ने यह साबित कर दिया कि यदि इच्छाशक्ति हो, तो सरकारी तंत्र के भीतर भी बेहतरीन परिणाम दिए जा सकते हैं।

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